Sunday, August 12, 2018

Old Story in Hindi - चरित्र का महत्व



Old Story in Hindi इस आर्टिकल में हम आपको बेस्ट ओल्ड स्टोरी देंगे। Old Story in Hindi ये स्टोरी आप अपने बच्चे को सुना सकते है और ये स्टोरी भगवान बुद्ध के ऊपर आधारित है। Old Story in Hindi ये स्टोरी बहोत ही पुराणी है। Old Story in Hindi ये स्टोरी आपको पसंद आएगी ये गेरंटी है हमारी आपसे। Old Story in Hindi निचे दी गयी है।

⇰ चरित्र का महत्व - Old Story in Hindi :


Old Story in Hindi

एक बार भगवान बुद्ध के पास एक ब्राह्मण आया.
काशी में उनके बिच  बहुत बातचीत हुई.
ब्राह्मण ने भगवान बुद्ध से पूछा की महान व्यक्ति किसे केहते हे?
भगवान बुद्ध ने कहा की  कुल, विध्या, धन, प्रतिष्ठा और शील  ऐ पांच वस्तु जिसके पास हे वो महान व्यक्ति केहलाता है.
ब्राह्मण ने फिर से पूछा की ऐ पांच वस्तु में से किसी एक वस्तु को कम करना हे तो आप किसे कम करोंगे?
भगवान बुद्ध ने कहा की में कुल को काम कर दूंगा क्युकी  व्यक्ति किस कुल में जन्मा वो मह्त्व का  नहीं हे.
ब्रामण ने  फिर से पूछा की एक और वस्तु कम करनी हे तो आप किस वस्तु को कम करेंगे?
तब भगवान बुद्ध ने कहा की में धन को कम कर दूंगा क्युकी धन के बगेर भी चलता हे.

फिर से ब्रामण ने पूछा अभी भी एक वस्तु कम करनी  हो तो आप किस वस्तु को कम करेंगे?
बुद्ध ने जवाब दिया प्रतिष्ठा क्युकी प्रतिष्ठा समाज में हो की न हो  ऐ जरुरी नहीं हे.
जो प्रतिष्ठा समाज में हे तो अच्छी बात हे लेकिन प्रतिष्ठा समाज में न हो तो चिंता करने की कोई बात नहीं है.
लेकिन शील और विध्या तो होनी ही चाहिए
ब्रामण ने फिर से सवाल किया की ऐ दो वस्तु में से अभी भी किसी एक वस्तु को कम करनी हे तो किस वस्तु को कम करेंगे?
तब भगवान बुद्ध ने जवाब दिया विध्या को कम करनी चाहिए क्युकी की विध्या के बगेर चलता हे लेकिन शील के बिना कभी नहीं चलता।
शील जीवन का आधार है,
शील विध्या का अंग है.
शील भविष्य का निर्माण करता है.
व्यक्ति के पास विध्या हे लेकिन जो शील नहीं हे तो उस विध्या का कोई मोल नहीं.

बोध;- "जीवन में सब वस्तु का मह्त्व हे लेकिन सबसे ज्यादा मह्त्व चरित्र का है.
इसीलिए हमारे यहाँ एक कहावत हे की धन गया तो कुछ नहीं गया, जो तंदुरस्ती बिगड़ी तो हमारा तन बिगड़ेगा लेकिन जो चरित्र बिगड़ा तो कुछ नहीं बचेगा."

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