Thursday, August 9, 2018

Nice Moral Stories in Hindi - इंसानियत



Nice Moral Stories in Hindi इस पोस्ट में मै आपको एक Moral Story दे रहा हु वो आप कभी भी पढ़ सकते है आपको मज़ा ही आएंगे वो गेरंटी है मेरी आप से। Nice Moral Stories in Hindi निचे दी हुई है।

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Nice Moral Stories in Hindi - इंसानियत

एक बार एक नन्ही लेकिन गहरी नदी को कई लोक पार कर रहे थे।
उस नदी पर पुल नहीं था. आते जाते लोगोने उसके स्व-अनुभव से कुछ रास्ता तय  कर लिया था.
सोच समज कर लोग  तय किये हुए रास्ते पर से नदी पार कर लेते। लोग जानते थे की तय किया हुवा रास्ते की दोनों और गहरे गढ़े थे. लेकिन पुल तो था ही नहीं इसलिए होता भी क्या ?
इसीलिए उस गहरी नदी को लोग ऐसे ही पार कर लेते थे.
पार कर रहे लोगो में एक दिन एक वृद्ध व्यक्ति भी था.
उसकी आँखो की कमजोरी के कारन महा-मुश्केली से उसने वो रास्ता पार किया। उसने पीछे देखा तो एक महिला उसके बच्चे के साथ वो रास्ता पार कर रही थी. उस वृद्ध व्यक्ति को उस महिला और उस बच्चे  पर दया आयी. वो वृद्ध व्यक्ति सुतार था. किनारे पर पहोचते ही उसने उसके बेग में से कुछ औजार निकाले.
आसपास के वृक्ष में से लकडिया काप कर उस वृद्ध ने पुल बनाना शरू किया. वहा से पार हो रहे कई लोगो ने उस नज़ारे को देखा, लेकिन किसी ने उस वृद्ध व्यक्ति को पूछा नहीं की दादा आप क्या कर रहे हो? पुल बना रहे हो?

अपने काम में मस्त वृद्धे ऊचे देखे बिना ही हा केह दी.
वहा से गुज़र रहे लोगो में से एक व्यक्ति ने दादाजी से पूछा,
'दादा! आप यही आसपास रहते हो?'
'नहीं! वृद्धे जवाब दिया'
'तो हररोज आपका यहाँ से आना-जाना लगा रेहता होगा ना?'
सवाल करनेवाला अचबे में था की यह व्यक्ति यहाँ नहीं रेहता तो ये मेहनत क्यु कर रहा हे?
'नहीं! दादाजी जीने लकडीको काटते हुए और अपना काम करते हुए कहा.
अब उस सवाल करनार व्यक्ति को बहुत अचम्बा हुवा,
उसे लगा की अपना स्वार्थ न होने के बावजूद भी  कोई इतना परेशान होगा?
उस व्यक्ति ने दादाजी से कहा की, 'दादा! तो यह मेहनत किस काम की?
आप किसके लिए यह पुल बांध रहे हो?'

अब उस दादाजी ने  ऊचे देखा, कुछ भी बोले बिना अपनी माता के साथ नदी पार कर रहे बच्चे की तरफ ऊँगली दिखाई और फिर से अपना काम करने लगे...'

"वह वृद्ध व्यक्ति अपने लिए नहीं किन्तु दूसरे लोगो के लिए वह पुल बना रहा था.
वह तो पहली बार वहा से गुज़र रहा था, फिर भी उसने दुसरो की तकलीफ देखी, समजी और दूसरे लोगो के लिए वह पुल बनाया, ताकि सब लोग बिना भय से वहा से गुज़र सके  और किसी व्यक्ति कोई तकलीफ न हो..."

बोध:- "हमेशा अपने लिए कुछ करने से बेहतर हे की हम दूसरे लोगो के भी कुछ करके दिखाए, तब ही हम सही अर्थ में इंसान कहलायेंगे और हमारा जीवन सार्थक होगा....."

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