Friday, August 10, 2018

Long Story in Hindi - ईश्वर महान है



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⇰ Long Story in Hindi - ईश्वर महान है


Long Story in Hindi - ईश्वर महान है

उदयपुर के राजा थे बलवंतसिंह, वो बहोत ही दयालु और कृपालु थे.
वो हर सुभह स्वयं अपने राज्य के भिखारी को खाने के लिए दान दिया करते थे.
दो भिखारी रामु और श्यामू हररोज उसने दरवाजे भीख लेने आया करते थे.
राजा बलवंतसिंह भी उन्हें उनके नाम से पहचान लिया करते थे.
रामु बूढ़ा था जबकि श्यामू नौजवान था.
एक दिन राजा की बेटी का जन्मदिन था तब राजा बहोत खुश थे, उस दिन राजा ने हररोज से ज्यादा भीख देने का ऐलान किया।
तब सब भिखारी बहोत खुश हुये और राजकुमारी की लम्बी उमर के लिए प्रार्थना करने लगे.

सबसे पहले राजा रामु को बुलाता हे और केहता हे की अपने हिस्से का दान स्वीकार करो.
रामु दान स्वीकार करता हे और भगवान को शुक्रिया अदा करता हे.
और भगवान से हाथ जोड़कर केहता हे की हे भगवान आप ही सबसे बड़े दाता हे, ये सुनकर राजा को गुस्सा आया और उसने रामु से कहा की तुम ६ महीने से मेरे दरवाजे पे दान लेने आते हो और धन्यवाद भगवान को करते हो, यदि में दान देना बंध करदु तो क्या तेरा भगवान तुजे दान देगा?
रामु केहता हे की भगवान ही सबसे बड़ा दाता हे, इतना कहते ही वहासे चला जाता है.
बाद में श्यामू अपने हिस्से का दान लेकर राजा का धन्यवाद करके वहा से चला जाता है.
सबके जाने के बाद राजा बहोत देर तक ये सोचते रहे की रामु को केसे सबक शिखाया जाये ताकि वो भगवान को धन्यवाद देने के बजाये मुझे धन्यवाद दे.
अगले दिन हमेसा की तरह रामु और श्यामू राजा के दरवाजे पर दान लेने जाते है.
राजा उन्हें उनके हिस्से का दान देते हे, फिर से रामु भगवान को धन्यवाद देता हे और श्यामू राजा को धन्यवाद देता है.
राजा रामु को रुकने के लिए केह्ते हे और श्यामू को बगल के रास्ते से जाने के लिए केहते हे जिस रास्ते पे सिर्फ राजा चलते हे, क्युकी उस रास्ते में एक बरतन में राजा ने ढेर सारे चांदी के सिक्के रखे हुए थे.
श्यामू उस रास्ते पर चल पड़ता हे कुछ ही दूर जाने पर वो अपने मन में सोचता हे की राजा कितने महान हे कितने दयालु हे, आपने मुझे उस रास्ते से जाने को कहा जिस रास्ते पे सिर्फ आप चलते हो, आज तो में अपनी आंखे बंध करके भी इस रास्ते पर चल सकता हु, ये सोचकर उसने अपनी आंखे बंध करली और उस रास्ते पर चलने लगा.
वो आंखे बंध करके चल रहा था इसीलिए उसने वो बरतन को नहीं देखा जिसमे चांदी के सिक्के रखे हुए थे.
कुछ ही देर बाद राजा रामु से केहता हे की श्यामू अब जा चूका होगा अब तुम भी जा सकते हो और तुम भी उसी रास्ते से जाना, जिस रास्ते से मेने श्यामू को भेजा था.
रामु भी हा केहकर वहा से चला गया.
रामु उस रास्ते पे जाता हे, कुछ देर बाद उसे वो बरतन नज़र आता हे जिस में चांदी के सिक्के थे.
वो उस बरतन को उठा लेता हे और उसे आश्चर्य होता हे की श्यामू को उस बरतन क्यु नहीं देखा, रामु भगवान को धन्यवाद देता है.
अगली सुबह जब राजा हमेसा की तरह अपने महेल के दरवाजे पर आये तो उन्होंने सोचा की खजाना मिलने की ख़ुशी में श्यामू की आँखों में अवश्य चमक होंगी परन्तु श्यामू शांत खड़ा था, राजा अपने आप पर काबू नहीं कर सके और उन्होंने श्यामू से पूछा की तुम्हारा कल का सफर केसा था? क्या रास्ते पे तुम्हे कोई चीज़ मिली थी?  तब श्यामू ने कहा नहीं राजन रास्ता इतना सुन्दर और साफ था की मेने अपनी आंखे बंध करली और अपने घर पहोच गया.
राजा समज गये उन्होंने रामु से पूछा रामु तुम अपना तजुर्बा सुनावो, तब रामु बोला रास्ता बहोत ही खुशनुमा था, मुझे रास्ते में चांदी के सिक्को से भरा हुवा एक बरतन मिला, और रामु बोला भगवान बहोत बड़ा दाता हे.

राजा को रामु की बात पसंद नहीं आयी, उन्होंने सोचा की किसी भी तरह रामु को ऐ मेहसूस कराना होगा की भगवान नहीं राजा बलवंतसिंह ही सही अर्थ में दान देने वाला दाता है.
राजा एक सप्ताह तक हमेसा की तरह उन दोनों को दान देते रहे, आठवे दिन दान में पैसे देने की बजाये राजा श्यामू को एक तरबूच देते हे, श्यामू उस दान से खुश नहीं था परन्तु राजा के सामने बोलने की उसकी हिम्मत नहीं हुई.
राजा ने हमेसा की तरह रामु को भी दान दिया और रामु ने फिर से भगवान का धन्यवाद किया.
तरबूच लेने के बाद श्यामू ने सोचा की इतने बड़े तरबूच का वो क्या करेंगा? इसलिए उसने वो तरबूच को तरबूच बेचने वाले को बेच दिया.
वही रामु अपने घर जाते वक़्त सोच रहा था की घर पर कोई सब्जी नहीं हे, बाजार जाके कुछ सब्जी लेते जाऊ.
रामु बाजार जाता हे और उसी तरबूच को वो खरीद लेता हे जिसे श्यामू बेच कर गया था.
घर जाकर जब वो तरबूच को काटता हे तो उसमे से ढेर सारे सोने के सिक्के निकलते हे.
वो हाथ ऊपर उठाकर बोलता हे की भगवान तुम महान हो, तू ही सबसे बड़ा दाता है.
अगले दिन हमेसा की तरह केवल श्यामू ही राजा से भीख लेने गया.
अकेले श्यामू को देखकर राजा ने पूछा की श्यामू रामु कहा हे ?

तब श्यामू बोला की राजन जैसे की रामु कहा करता था की सबसे बड़ा दाता भगवान हे, वाके ही सबसे बड़ा दाता भगवान ही हे.
कल वो बाजार से एक तरबूच खरीदकर घर ले गया, उसने तरबूच को काटा तो उसमे से उसे बहोत सारे सोने के सिक्के मिले जिससे वो अब एक अमीर आदमी बन गया हे वो भी भगवान की कृपा से.
इतना केहकर श्यामू अपने हिस्से का दान लेकर चला गया.
श्यामू के चले जाने के बाद राजा अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर कर आसमान की और सर उठाकर केहते हे की "हे भगवान तू ही सबसे बड़ा देने वाला और पालन करनेवाला हे, हम तो मात्र तुच्छ प्राणी हे."

बोध:-"भगवान ही दुनिया में सब कुछ देता है, वही राज करता है, उसकी मरजी के बिना किसी को कुछ नहीं मिल सकता, वही पालनहार हे."

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